नवरात्र

चैत्र नवरात्रि आज से , नौ दिनों के ये उपाय बदल सकते हैं आपकी तकदीर :-

नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. ऐसे में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) 2 अप्रैल 2022 को शुरू होगी और इसका समापन 11 अप्रैल 2022 को होगा. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है और अष्टमी और नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन किया जाता है.

नवरात्रि 2022 उपाय :-

▪️अगर आपके घर में पैसों को लेकर दिक्कतें चल रही हैं और बिल्कुल भी पैसा नहीं बचता या पैसों का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है तो इसके लिए नवरात्रि के 9 दिनों में से किसी भी एक दिन पान के पत्ते में तीन लौंग रखें और माता रानी को अर्पित करें. माता रानी को ये अर्पित करने से पहले इसे हाथ में रखकर मन में विचार करें और माता रानी से प्रार्थना करें कि आपकी पैसों से संबंधित सभी समस्याएं समाप्त हो जाए. इसके बाद इस पान के पत्ते और लौंग को नवरात्रि के आखिरी दिन किसी डिब्बे में रखकर अपनी तिजोरी में रख सकते हैं. इसे एक महीने के लिए रखें और एक महीने के बाद बहते हुए पानी में बहा दें.

▪️अगर आपकी शादीशुदा जिंदगी में कोई दिक्कत चल रही हैं आपके बीच काफी अनबन रहती है या तलाक तक बात चली गई है तो आपको नवरात्रि के इन 9 दिनों में रोज एक पान का पत्ता लेना है और उसमें एक केसर रखना है. आपके इसे रोज मां दुर्गा को अर्पित करना है. अर्पित करते समय मन में ये विचार रखें कि माता रानी आपके सभी कष्टों को दूर कर देंगी.

  • अगर आप किसी चीज को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहते हैं तो इसके लिए आप नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और माता रानी से प्रार्थना करें कि आपके इस तनाव को जिंदगी से दूर करें. 9 दिन इस विचार के साथ पाठ करें

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त :-

घटस्थापना 2 अप्रैल 2022 को शनिवार के दिन होगी. घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. यानी आपको लगभग 2 घंटे का ही समय मिलेगा.

घटस्थापना का महत्व

नवरात्रि में घटस्थापना का खास महत्व होता है. इसे कलश स्थापना के नाम से भी जाना जाता है. कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. देवी दुर्गा की पूजा से पहले कलश की पूजा की जाती है. पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगाजल से साफ किया जाता है. फिर सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है. कलश स्थापना के बाद, गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते है जिसके बाद नौ दिनों का व्रत शुरू हो जाता है.

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