बच्चो को कैसे संस्कार दे ?(How to educate children? )

अपने बच्चो को कार दिलाने से पहले संस्कार दो क्योंकि अगर संस्कार नही है तो कार भी सोभा नही देगी :- pandit pradeep ji mishra sehore wale
मनुष्य के जीवन में चार गुरु होते है
- प्रथम गुरु – मां होती हैं
- द्वितीय गुरु – पिता होते है
- तृतीय गुरु – शिक्षक होते है
- चतुर्थ गुरु – सदगुरु होते है
मां बच्चे की प्रथम गुरु होती हैं इसलिए बच्चो में सर्वाधिक संस्कार मां के द्वारा ही बच्चो को दिये जाते हैं मां के द्वारा दिये संस्कार ही बच्चो के भविष्य का निर्माण करती हैं
बचपन में मां ने जिस तरह से बच्चो को शिक्षा दी है बच्चा बड़ा होकर वैसे ही बनेगा , यह बात हम इस प्रसंग के माध्यम से जानेंगे
एक पिताजी खुब खांसते थे इतना खांसते थे कि बच्चो की पढ़ाई भी नहीं हो पाती थी तो बहु ने अपने पति से कहा कि पिताजी जी की खासी की वजह से बच्चो की पढ़ाई नहीं हो रही हैं हम पिताजी को पीछे चौकीदार वाले कमरे भी ठहरा देते हैं पति अपनी पत्नी की बात पर सहमति जताई और अपने पिता को चौकीदार वाले कमरे में ठहरा दिया और अपने पिता से कहा कि पिताजी आपको कुछ भी चाइए तो यह घंटी लगा रहा हूं बजा देना | पिताजी को जब भी कुछ चाइए होता तो वह घटी बजा देता और वो बहु उनके लिए चाय , पानी भोजन आदि ला लेती
एक दिन पिताजी ने पानी मगवाने के लिए घंटी बजाई लेकिन घंटी बजी नही पिताजी ने बहुत प्रयास किया लेकिन घंटी बजी नही अधिक प्यास लगने के कारण पिताजी बेहोश हो गए
जब बेटा काम करके रात को घर आया तो अपनी पत्नी से पुछा कि पिताजी को कुछ दिया तो पत्नी ने कहा कि उन्होंने आज घंटी ही नहीं बजाई शायद उनको कुछ चाइए नही होगा बेटा तुरंत अपने पिता के पास गया तो पिता बेहोश पड़े थे , बेटे ने पिता के मुंह पर पानी के छीटे डालकर उनको जगाया बेटे ने पिता जी को पूछा पिताजी आज घंटी नही बजाई तब पिता ने कहा घंटी तो बहुत बजायी किकिन घंटी से रस्सी आ रही थी वो रस्सी चूहों ने कुतर दी इसलिए घंटी बजी ही नहीं , इतना कहकर पिताजी चल बसे
पिताजी का अंतिम संस्कार हुआ , अंतिम संस्कार के कुछ दिन बाद जब घर की सफाई हो रही थी तो एक बेटे ने घंटी जेब में रखी और दुसरे बेटे ने वो रस्सी जेब में रखी तो उनकी मां ने कहा कि ये क्या कर रहे हो तब दोनो बेटो ने जवाब दिया कि मां जैसे आपने दादाजी के लिए घंटी लगाई थी वैसे ही आप जब बूढ़ी होगी तब आप की बहूवे भी घटी लगायेगी तो यह घंटी और काम आ जाएगी यह सुनकर उस मां की आखों में आंसु आ गए
इसलिए जैसा करोगे वैसे भरोगे , जैसे बच्चो को संस्कार दोगे वैसे ही बच्चे बनेंगे
इसलिए अपने बच्चो को अच्छे संस्कार दीजिए आप के बुढापे में आप के दिए हुए यही संस्कार आप के काम आयेगे
ओम् नमः शिवाय
मेरे घर के आंगन में त्रिवेणी है तो कुछ लोगों का मानना है कि आछा नहीं होता है
मेरे घर के आंगन में त्रिवेणी है तो कुछ लोगों का मानना है कि आछा नहीं होता है