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बिना मंत्र अभिमंत्रित किए कभी भी नहीं धारण करें रुद्राक्ष माला :-

इस पृथ्वीपर जो मनुष्य मन्त्रके द्वारा अभिमन्त्रित
किये बिना ही रुद्राक्ष धारण करता है, वह क्रमशः
चौदह इन्द्रोंके कालपर्यन्त घोर नरकको जाता है ( शिवमहापुराण , गीताप्रेश गोरखपुर )

रुद्राक्ष माला धारण करने से पूर्व किस मंत्र का करे जाप :-

शिव महापुराण की पुस्तक के अनुसार रुद्राक्ष माला धारण करने से पूर्व विशेष शिव मंत्र ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करके ही रुद्राक्ष माला धारण करें तभी इसकी सार्थकता सिद्ध होगी

क्यों करें रुद्राक्ष माला को धारण ?

रुद्राक्षकी माला धारण करनेवाले पुरुषको देखकर
भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा जो अन्य
द्रोहकारी राक्षस आदि हैं, वे सब के सब दूर भाग
जाते हैं। जो कृत्रिम अभिचार आदि कर्म प्रयुक्त होते
हैं, वे सब रुद्राक्षधारीको देखकर सशंक हो दूर चले
जाते हैं ( शिवमहापुराण , गीताप्रेश गोरखपुर )

रुद्राक्ष के प्रकार तथा उसकी महत्वता :-

▪️तीनमुखी रूद्राक्ष-दुकान नही चलती, व्यापार नहीं चलता,
उसको गादी ऊपर या कुर्सी के ऊपर लाल धागे से बांधकर ऊँ क्लीम नमः यह मंत्र बोलकर लटका देना ।

▪️चार मुखी रूद्राक्ष – ऊँ नमः बोलकर दूध चढाकर मंत्र का ५

बार स्मरण करना । वह दूध मासिक पाली के ७ वे दिन से
सवा महिने तक पीने से पुत्र प्राप्ति होगी।

▪️पांचमुखी रूद्राक्ष– जितना बड़ा हो उतना अच्छा नया काम
करना हो तो इस रूद्राक्ष को सिरहाने रखें और मंत्र बोले म
हिम् नमः फ

▪️छः मुखी रूद्राक्ष क्लेश मिटाने के लिए उपयोग करें । ॐ
हूम नमः बोलकर पूजन के स्थान में रखना ।

▪️सात मुखी रूद्राक्ष-दरिद्र व्यक्ति पहनें तो वो करोड़पति बन
जाता है। रूद्राक्ष गाय के दूध में धो लें और पीले कपड़े में
बांधे । ॐ नमः हिम हुम नमः मंत्र बोलकर ९१ दिन के बाद
दाहिने हाथ में बांधना।

▪️आठमुखी रुद्राक्ष अपार संपदा के लिए ८ मुखी रुद्राक्ष को
ईशान्य कोने में पानी की कटोरी में रखें। रुद्राक्ष जितना पानी पीयेगा, उतनी संपदा बढ़ेगी।

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